स्व. मथुरा मोहन श्रीवास्तव की पुण्य स्मृति में सजी सुरों की महफिल, शास्त्रीय गायन से दी स्वरांजलि


 बेतवा भूमि न्यूज़ ग्वालियर। 

पं. गंगा प्रसाद पाठक ललित कला न्यास द्वारा ग्वालियर घराने के सुप्रसिद्ध गायक, संगीताचार्य एवं न्यास के संस्थापक न्यासी स्व. मथुरा मोहन श्रीवास्तव के पुण्य स्मरण में माहेश्वरी सेवा ट्रस्ट, तलैया में शास्त्रीय संगीत संध्या का आयोजन किया गया। कलाकारों ने शास्त्रीय गायन की मनमोहक प्रस्तुतियों के माध्यम से स्व. श्रीवास्तव को भावपूर्ण स्वरांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम का शुभारंभ नगर की युवा गायिका कुमारी अवनि भार्गव के गायन से हुआ। उन्होंने राग यमन में विलंबित एकताल में निबद्ध रचना “करिये कृपा मोपे मोरे श्याम मुरारी” प्रस्तुत की। क्रमिक स्वर विस्तार, आलाप, बोलतान और विभिन्न लयकारियों के साथ उन्होंने अपनी कर्णप्रिय आवाज से श्रोताओं को प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने मध्यलय एकताल में “सबके हितकारी, महादेव त्रिपुरारी” की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर गायन का समापन किया। तबले पर युवा तबला वादक पं. शशिकांत शर्मा तथा हारमोनियम पर पं. नीलेश तिवारी ने प्रभावी संगत की।

इसके बाद दिल्ली से आए किराना एवं रामपुर-सहसवान घराने के प्रतिष्ठित गायक डॉ. अविनाश कुमार ने राग जोग में विलंबित एकताल की बंदिश “पियरवा को बिलमाये” प्रस्तुत की। मधुर कंठ, विविध स्वर संयोजन और आकर्षक लयकारियों से उन्होंने प्रस्तुति को यादगार बना दिया। उनकी द्रुत तानों पर श्रोता मंत्रमुग्ध नजर आए। तबले पर डॉ. अशेष उपाध्याय और हारमोनियम पर पं. नीलेश तिवारी ने कुशल संगत की।

डॉ. अविनाश कुमार ने राग जोग में द्रुत तीनताल की बंदिश “मन चाहता मिलबे को सखी श्याम सों” तथा द्रुत एकताल में स्वरचित बंदिश “नाद जोग सरस” प्रस्तुत की। कार्यक्रम के समापन पर राग भैरवी में स्वरचित सरस भजन “शारदे मां जगत जननी” ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

कार्यक्रम से पूर्व कलाकारों एवं न्यासीगणों ने मां सरस्वती तथा स्व. मथुरा मोहन श्रीवास्तव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की। न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष गोविंद देवलिया ने न्यास की गतिविधियों की जानकारी दी, जबकि सचिव सुनील जैन ने आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का मनमोहक संचालन प्रवीण शर्मा ने किया।

इस अवसर पर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति शाह सहित बड़ी संख्या में संगीतप्रेमी, कलाकार, साहित्यकार एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन ने शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा और स्व. मथुरा मोहन श्रीवास्तव के संगीत क्षेत्र में योगदान को भावपूर्ण ढंग से स्मरण किया।