विदिशा में संत रामपाल जी महाराज के सत्संग ने खोली शास्त्रों में छिपी सच्चाई: 'संसार रूपी वृक्ष' का गूढ़ रहस्य हुआ उजागर


 बेतवा भूमि  न्यूज़  विदिशा।
सांवरिया सेठ कॉलोनी, डाबर रुसल, विदिशा में संत रामपाल जी महाराज जी का एक दिवसीय सत्संग समारोह अत्यंत शांतिपूर्ण और अनुशासनपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। प्रोजेक्टर और LCD टीवी के माध्यम से आयोजित इस आध्यात्मिक कार्यक्रम में, जिले के विभिन्न ग्रामों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने संत रामपाल जी महाराज जी के अमूल्य प्रवचनों का लाभ लिया।
गीता के गूढ़ रहस्य का उद्घाटन
सत्संग का मुख्य केंद्र श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 15, श्लोक 1 से 4 में वर्णित 'उल्टे लटके हुए संसार रूपी वृक्ष' का रहस्य था। संत रामपाल जी महाराज जी ने इस गूढ़ विषय का खुलासा करते हुए समझाया कि:
  तत्वदर्शी संत की पहचान: उन्होंने बताया कि गीता में ही प्रमाण है कि जो संत इस संसार रूपी वृक्ष की जड़ से लेकर पत्तियों तक की संपूर्ण और सही जानकारी प्रदान कर दे, वही सच्चा तत्वदर्शी संत कहलाता है।
  सत्य की प्रस्तुति: संत रामपाल जी महाराज जी ने इस संसार रूपी वृक्ष की संपूर्ण वैज्ञानिक व्याख्या प्रस्तुत की और यह सिद्ध किया कि वे ही वर्तमान युग के शास्त्र-आधारित तत्वदर्शी संत हैं।
समाज में आध्यात्मिक क्रांति और सेवा
संत रामपाल जी महाराज जी के प्रवचन वर्तमान में समाज में एक अद्वितीय आध्यात्मिक ज्ञान की क्रांति ला रहे हैं। उनके शास्त्रानुसार उपदेशों से लोगों में नई सोच, नैतिकता, और भाईचारे की भावना जागृत हो रही है।
  समाज सुधार के प्रयास: महाराज जी समाज से नशामुक्ति, दहेज प्रथा, भ्रूण हत्या, जातिवाद, और पाखंड जैसी बुराइयों को जड़ से खत्म कर समानता और एकता का सशक्त संदेश दे रहे हैं।
  निस्वार्थ सेवा: इसके अतिरिक्त, उनके अनुयायी रक्तदान शिविरों और अन्नपूर्णा मुहिम के माध्यम से जरूरतमंदों की निस्वार्थ सेवा में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं।
संपूर्ण कार्यक्रम ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक ज्ञान से समृद्ध किया और समाज सुधार की दिशा मे