पूर्णब्रह्म कबीर साहेब के प्राकट्य दिवस के उपलक्ष्य में होने जा रहे महा विशाल समागम की तैयारियां जोरों पर आध्यात्मिक महाकुंभ: संत रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में मनेगा कबीर साहेब का 629 वां प्रकट दिवस

बेतवा भूमि न्यूज़ बैतूल 
पूर्णब्रह्म कबीर साहेब के प्राकट्य दिवस के उपलक्ष्य में होने जा रहे महा विशाल समागम की तैयारियां जोरों पर
आध्यात्मिक महाकुंभ: संत रामपाल जी महाराज की पावन उपस्थिति में मनेगा कबीर साहेब का 629 वां प्रकट दिवस
बैतूल: आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक सुधार के एक अनूठे संगम के रूप में, आगामी 27 से 29 जून तक पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी का 629 वां प्रकट दिवस बेहद भव्य पैमाने पर मनाया जाएगा। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी की पावन उपस्थिति में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय महासमागम को लेकर नेपाल सहित भारत के सभी सतलोक आश्रमों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह विशेष आयोजन उस ऐतिहासिक और दिव्य घटना की याद में किया जाता है, जब आज से लगभग 628 वर्ष पूर्व ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा के दिन पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी काशी के लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर एक शिशु के रूप में प्रकट हुए थे व नीरू नीमा नामक दंपत्ति को मिले थे। इस बार मध्य प्रदेश के बैतूल स्थित सतलोक आश्रम ग्राम उड़दन में होने वाले समागम में देशभर से लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है, जहाँ आश्रम में तैयारियां जोरों से चल रही है, चारों तरफ भक्ति का माहौल है और सेवादार दिन रात अपनी सेवाओं में लगे हुए है। पूरे आश्रम को फूलों व लाइटिंग से सजाया जा रहा है जो देखने पर हर आने जाने वाले को आकर्षित कर रहा है।
तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में कई बड़े आध्यात्मिक और जनहितैषी कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहेंगे। समागम के दौरान आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज की अमरवाणी 'अमर ग्रंथ साहिब' का तीन दिन तक अखंड पाठ किया जाएगा। इसके साथ ही एक विशाल भंडारा अनवरत चलेगा, जिसमें शुद्ध देसी घी के मिष्ठान लड्डू-जलेबी आदि पकवान तैयार किए जा रहे हैं। आत्मिक कल्याण की राह तलाश रहे लोगों के लिए संत रामपाल जी महाराज द्वारा 'निःशुल्क नाम दीक्षा' (गुरु मंत्र) की व्यवस्था भी रहेगी। वहीं, सामाजिक कुरीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए यहाँ बेहद सादगीपूर्ण तरीके से 'रमैनी' पद्धति द्वारा अनेक जोड़ो के दहेज-मुक्त विवाह संपन्न कराए जाएंगे, जिसमें बिना किसी तामझाम या फिजूलखर्ची के मात्र 17 मिनट में जोड़े परिणय सूत्र में बंधेंगे।
इसके अलावा, वैचारिक क्रांति के लिए पवित्र ग्रंथों—वेदों, गीता, कुरान और गुरु ग्रंथ साहिब के प्रमाणों पर आधारित एक विशाल आध्यात्मिक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी, जो जिज्ञासुओं की शंकाओं का समाधान करेगी। मानव सेवा की मिसाल पेश करते हुए इस दौरान बड़े पैमाने पर रक्तदान, देहदान और मुफ्त चिकित्सा शिविरों का आयोजन भी होगा। सबसे खास बात यह है कि लाखों की तादाद में आने वाले भक्तों के लिए ठहरने, भोजन और सुरक्षा की तमाम व्यवस्थाएं पूरी तरह से निःशुल्क रहेगी। इस पावन अवसर पर सोशल मीडिया और घर घर जाकर निमंत्रण पत्रों के जरिए समाज के हर वर्ग, बुद्धिजीवियों और राजनेताओं को इस दिव्य समागम का हिस्सा बनने के लिए खुला निमंत्रण दिया गया है।