अन्नपूर्णा मुहिम के तहत जरूरतमंद परिवार को राशन व घरेलू उपयोगी सामग्री प्रदान, मानवता की मिसाल बने संत रामपाल जी महाराज।।



बेतवा भूमि संगरिया (हनुमानगढ़),
 22 जुलाई।
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सान्निध्य में संचालित अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत हनुमानगढ़ जिले की संगरिया तहसील के गांव मोरजण्ड सिखान में आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद गुरपाल सिंह पुत्र दर्शन सिंह के परिवार को राशन एवं घरेलू उपयोग की आवश्यक सामग्री प्रदान की गई।
इस सेवा कार्य के दौरान परिवार को रसोई बनाने का आटा, दाल, चावल, तेल, मसाले, चीनी सहित अन्य खाद्य सामग्री के साथ-साथ रसोई गैस चूल्हा, गैस सिलेंडर, बर्तन, वस्त्र तथा दैनिक जीवन में उपयोग आने वाली आवश्यक वस्तुएँ सम्मानपूर्वक भेंट की गईं। इस अवसर पर उपस्थित सेवादारों ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से परमार्थ कार्यों में मानव सेवा को सर्वोच्च मानते हुए गरीब असहाय ,लाचार और जरूरतमंद परिवारों तक बिना किसी भेदभाव के सहायता पहुँचाई जा रही है।
संत रामपाल जी महाराज का संदेश है कि- "*है काम आदमी का औरों के काम आना। जीना तो है उसी का, जिसने यह राज जाना*।।
सच्ची भक्ति के साथ में दीन-दुखियों की सेवा, परोपकार और मानवता के उत्थान भी निहित है। 
इसी उद्देश्य को लेकर उनके अनुयायी देशभर में अन्नपूर्णा मुहिम, रक्तदान, नशामुक्ति, दहेजमुक्त विवाह, पर्यावरण संरक्षण तथा अन्य जनकल्याणकारी अभियान संत जी के आदेश पर निरंतर चला रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज में करुणा, सहयोग और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं। अन्नपूर्णा मुहिम आज असंख्य जरूरतमंद परिवारों के लिए आशा का आधार बनकर समाज सेवा की एक प्रेरणादायी मिसाल प्रस्तुत कर रही है।
इस अवसर पर सेवादारों ने बताया कि गुरपाल सिंह पुत्र दर्शन सिंह के परिवार को यह सहायता केवल एक बार तक सीमित नहीं रहेगी। अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत परिवार को आवश्यक राशन सामग्री नियमित रूप से तब तक उपलब्ध कराई जाएगी, जब तक परिवार का कोई भी सदस्य रोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भर होकर परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं हो जाता। संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा से संचालित इस सेवा का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार अभाव और भूख के कारण कठिनाइयों का सामना न करे तथा आत्मनिर्भर बनने तक उसे निरंतर सहयोग मिलता रहे।।